क्या सपने अपनों से बड़े होते है - संयुक्त

08:29:00

माता पिता आजीवन अपने बारे में न सोच कर अपने बच्चों के बारे में सोचते हैं ,लेकिन बड़े होते ही वही बच्चे अपने माता पिता को छोड़कर कही दूर चले जाते है,सिर्फ अपने सपनों को पूरा करने के लिए। आजकल की ज़िन्दगी में बच्चों को अपने परिवार की याद तभी आती है जब उन्हें इस बाहरी दुनिया ने कुछ चोट पहुँचायी हो या फिर उन्हें फिर से अपने माता पिता से कुछ चाहिए होता है।

पर सवाल यह उठता की रिश्ते अब केवल जरूरतों तक ही सीमत रह गए हैं क्या ?

इसी मुद्दे को उठाने और अपनों को उनके परिवार से मिलाने की संयुक्त सोच के साथ ज़ी टीवी लेकर आ रहा है एक नए धारावाहिक को, जिसका मुद्दा रहेगा की क्या सपने अपनों से बड़े होते है।

संयुक्त एक ऐसे परिवार के बूढ़े माता पिता की कहानी है जो अकेले अपने घर में रहते है पर अपनों के बिना। बेटे बहुयों के होते हुए भी एक ही शहर में माता पिता अकेले रहते हैं। बेटे घर आते हैं ,पर मेहमानों की तरह । ऐसा ही कुछ हम सब भी अपनों के साथ करते हैं या अपने हमारे साथ। इस सबके के कारण ही संयुक्त परिवार का वजूद कहीं खोता जा रहा हैं ।

हम सलाम करते हैं ज़ी टीवी की इस नयी पहल को ,नयी सोच को और आशा करते हैं की यह लोगो की सोच बदलने में कामयाब रहे । लोगों को यह सन्देश पहुँचाने में कामयाब रहे की सपने अपनों के साथ रहते हुए भी पूरे किये जा सकते हैं उनके लिए अपनों को छोड़ने की आवश्यकता नही हैं ।

अगर आप भी ज़ी टीवी की इस पहल से जुड़ना चाहते हैं ,तो देखना न भूलें ६ सितम्बर से संयुक्त .

प्रसारण समय - शाम  7:३०
दिन - सोमवार से शुक्रवार
चैनल -  ज़ी टीवी



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